ravi ki bast qwali
演唱:Ravi Kumarतेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं हर ज़हन में तेरा नाम बस है पर तू ही मेरा जुनून नहीं
ऐ खुदा
अल्लाह ये कैसी जुदाई है जिसे चाहा वही पराई है
हमने तो हर दुआ में तुझे ही माँगा तेरे नाम की माला हर रोज़ जप ली है तूने मगर ना समझा कभी दिल की आवाज़ हमने तो तेरे लिए हर हद तक चल ली
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
ऐ खुदा
तेरे शहर की गलियाँ अब वीरान सी लगती है तेरी मुस्कान की रोशनी अब कहाँ से मिलती है तू कहता था क़यामत तक साथ रहेगा तेरे क्यों मेरी दुनिया कलहासी लगती है कभी तो लौट के आ दे वज़ा तेरे बिना वो दूरी है ये दास्तां सीता हमने वो हर दिन के इबादत समझा फिर तूने बसेर खेल किया हम मेरे वफ़ा को सजदा किया तूने हर लुफ्त ने छर किया
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
अब तो रब से लही इल्तिजा है आँखों को ला दे तेरा चेहरा या फिर लौटा दे वो वक़्त जहाँ तेरा और मेरा एक ही साया था
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं तेरे बिना अब सुकून कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं पर तेरे तुले तेरा नाम बस है पर तू ही मेरा जुनून नहीं
ऐ खुदा
अब तो रब से लही इल्तिजा है आँखों को ला दे तेरा चेहरा या फिर लौटा दे वो वक़्त जहाँ तेरा और मेरा एक ही साया था
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
ऐ खुदा
अल्लाह ये कैसी जुदाई है जिसे चाहा वही पराई है
हमने तो हर दुआ में तुझे ही माँगा तेरे नाम की माला हर रोज़ जप ली है तूने मगर ना समझा कभी दिल की आवाज़ हमने तो तेरे लिए हर हद तक चल ली
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
ऐ खुदा
तेरे शहर की गलियाँ अब वीरान सी लगती है तेरी मुस्कान की रोशनी अब कहाँ से मिलती है तू कहता था क़यामत तक साथ रहेगा तेरे क्यों मेरी दुनिया कलहासी लगती है कभी तो लौट के आ दे वज़ा तेरे बिना वो दूरी है ये दास्तां सीता हमने वो हर दिन के इबादत समझा फिर तूने बसेर खेल किया हम मेरे वफ़ा को सजदा किया तूने हर लुफ्त ने छर किया
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
अब तो रब से लही इल्तिजा है आँखों को ला दे तेरा चेहरा या फिर लौटा दे वो वक़्त जहाँ तेरा और मेरा एक ही साया था
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं तेरे बिना अब सुकून कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं पर तेरे तुले तेरा नाम बस है पर तू ही मेरा जुनून नहीं
ऐ खुदा
अब तो रब से लही इल्तिजा है आँखों को ला दे तेरा चेहरा या फिर लौटा दे वो वक़्त जहाँ तेरा और मेरा एक ही साया था
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं
तेरे बिना अब चैन कहाँ दिल को कोई सुकून नहीं